| blocks | | id | "Nakha-1" |
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| oldKey | "NNS_C01_V01" |
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| type | "verse" |
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| parent | "NNS_C01" |
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| chapter | "NNS_C01" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "पान्त्वस्मान् पुरुहूतवैरिबलवन्मातङ्गमाद्यद्घटाकुम्भोच्चाद्रिविपाटनाधिकपटुप्रत्येकवज्रायिताः ।
श्रीमत्कण्ठीरवास्यप्रततसुनखरादारितारातिदूरप्रध्वस्तध्वान्तशान्तप्रविततमनसा भाविता (नाकिवृन्दैः) भूरिभागैः॥1॥" |
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| id | "Nakha-2" |
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| oldKey | "NNS_C01_V02" |
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| type | "verse" |
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| parent | "NNS_C01" |
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| chapter | "NNS_C01" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "लक्ष्मीकान्त समन्ततोऽपि(वि)कलयन्नैवेशितुस्ते समं पश्याम्युत्तमवस्तु दूरतरतोपास्तं रसो योष्टमः ।
यद्रोषोत्करदक्षनेत्रकुटलिप्रान्तोत्थिताग्निस्फुरत्खद्योतोपमविस्फुलिङ्गभसिता ब्रह्मेशशक्रोत्कराः ॥2॥" |
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