Bhagavatatatparyanirnaya/C9/S9: Difference between revisions
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'नित्यपूर्णसुखज्ञप्तिस्वरूपोऽसौ यतो विभुः ।अतोऽस्य राम इत्याख्या तस्य दुःखं कुतोऽण्वपि ॥तथाऽपि लोकशिक्षार्थमदुःखो दुःखवर्तिवत् ।अन्तर्हितां लोकदृष्ट्या सीतामासीत्स्मरन्निव ॥ज्ञापनार्थं पुनर्नित्यसम्बन्धं स्वात्मनः श्रिया ।अयोध्याया विनिर्गच्छन्सर्वलोकस्य चेश्वरः ॥प्रत्यक्षं तु श्रिया सार्धं जगामानादिरव्ययः''॥'नक्षत्रमासगणितं त्रयोदशसहस्रकम् ।ब्रह्मलोकसमं चक्रे समस्तं क्षितिमण्डलम् ॥रामो रामो राम इति सर्वेषामभवत्तदा ।सर्वो राममयो लोको यदा रामस्त्वपालयत् ॥"इति स्कान्दे ॥ १५-१९,२३ ॥ | |||
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Revision as of 05:35, 8 April 2026
नवमोऽध्यायः
मुनौ निक्षिप्य तनयौ सीता भर्त्रा विवासिता ।ध्यायन्ती रामचरणौ विवरं प्रविवेश ह ॥ १५ ॥
तच्छ्रुत्वा भगवान् रामो रुन्धन्नपि धिया शुचः ।स्मरंस्तस्या गुणांस्तांस्तान् नाशक्नोद् रोद्धुमीश्वरः ॥ १६ ॥
स्त्रीपुम्प्रसङ्ग एतादृक् सर्वत्र त्रासमावहः ।अपीश्वराणां किमुत ग्राम्यस्य गृहमेधिनः ॥ १७ ॥
तत ऊर्ध्वं ब्रह्मचर्यं धारयन्नजुहोत् प्रभुः ।त्रयोदशाब्दसाहस्त्रमग्निहोत्रमखण्डितम् ॥ १८ ॥
स्मरतां हृदि विन्यस्य बुद्धं पद्ममिवांशुकैः ।स्वपादपल्लवं राम आत्मज्योतिरगात् ततः ॥ १९ ॥
पुरुषो रामचरितं श्रवणैरुपधारयन् ।आनृशंस्यपरो राजन् कर्मबन्धैर्विमुच्यते ॥ २३ ॥
'नित्यपूर्णसुखज्ञप्तिस्वरूपोऽसौ यतो विभुः ।अतोऽस्य राम इत्याख्या तस्य दुःखं कुतोऽण्वपि ॥तथाऽपि लोकशिक्षार्थमदुःखो दुःखवर्तिवत् ।अन्तर्हितां लोकदृष्ट्या सीतामासीत्स्मरन्निव ॥ज्ञापनार्थं पुनर्नित्यसम्बन्धं स्वात्मनः श्रिया ।अयोध्याया विनिर्गच्छन्सर्वलोकस्य चेश्वरः ॥प्रत्यक्षं तु श्रिया सार्धं जगामानादिरव्ययः॥'नक्षत्रमासगणितं त्रयोदशसहस्रकम् ।ब्रह्मलोकसमं चक्रे समस्तं क्षितिमण्डलम् ॥रामो रामो राम इति सर्वेषामभवत्तदा ।सर्वो राममयो लोको यदा रामस्त्वपालयत् ॥"इति स्कान्दे ॥ १५-१९,२३ ॥