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Revision as of 19:34, 10 April 2026
नरसिंहनखस्तोत्रम्
टीका
- नखस्तुति-टीका — बालबोधिनी — विश्वपतीया
- नखस्तुति-टीका — मन्दबोधिनी — छलारीया
नरसिंहनखस्तोत्रम्
पान्त्वस्मान् पुरुहूतवैरिबलवन्मातङ्गमाद्यद्घटाकुम्भोच्चाद्रिविपाटनाधिकपटुप्रत्येकवज्रायिताः ।श्रीमत्कण्ठीरवास्यप्रततसुनखरादारितारातिदूरप्रध्वस्तध्वान्तशान्तप्रविततमनसा भाविता (नाकिवृन्दैः) भूरिभागैः॥1॥
लक्ष्मीकान्त समन्ततोऽपि(वि)कलयन्नैवेशितुस्ते समं पश्याम्युत्तमवस्तु दूरतरतोपास्तं रसो योष्टमः ।यद्रोषोत्करदक्षनेत्रकुटलिप्रान्तोत्थिताग्निस्फुरत्खद्योतोपमविस्फुलिङ्गभसिता ब्रह्मेशशक्रोत्कराः ॥2॥
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यविरचितं नरसिंहनखस्तोत्रम् ॥