Yatipranavavakalpa/Moola: Difference between revisions
Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3) |
Imported from pramati-sarvamoola XML (grantha.io importer v3) |
||
| Line 2: | Line 2: | ||
<div class="gr-page-nav">← [[Yatipranavavakalpa|Yatipranavavakalpa]]</div> | <div class="gr-page-nav">← [[Yatipranavavakalpa|Yatipranavavakalpa]]</div> | ||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V01 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = समिच्चर्वाज्यकान्हुत्वा सम्यक्पुरुषसूक्ततः । | |||
| verse_lines = समिच्चर्वाज्यकान्हुत्वा सम्यक्पुरुषसूक्ततः ।¦सर्वेषामभयं दत्वा विरक्तः प्रव्रजेद्धरिम्॥ १॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V02 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = श्रुत्वा भागवतं शुद्धमाचार्यं शरणं व्रजेत् । | |||
| verse_lines = श्रुत्वा भागवतं शुद्धमाचार्यं शरणं व्रजेत् ।¦अधीहि भगवो ब्रह्मेत्यस्मै ब्रूयाद्गुरुः परम्॥ २॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V03 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = उच्चारयेत्त्रिशस्तारं दक्षिणे श्रवणे तथा । | |||
| verse_lines = उच्चारयेत्त्रिशस्तारं दक्षिणे श्रवणे तथा ।¦ऋषिच्छन्दोदैवतानि ब्रूयात्तस्य क्रमात्सुधीः॥ ३॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V04 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = अन्तर्यामीति गायत्री परमात्मेत्यनुक्रमात् । | |||
| verse_lines = अन्तर्यामीति गायत्री परमात्मेत्यनुक्रमात् ।¦विश्वश्च तैजसः प्राज्ञस्तुर्यश्चाक्षरदेवताः॥ ४॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V05 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = कृष्णो रामो नृसिंहश्च वराहो विष्णुरेव च । | |||
| verse_lines = कृष्णो रामो नृसिंहश्च वराहो विष्णुरेव च ।¦परञ्ज्योतिः परम्ब्रह्म वासुदेव इति क्रमात्॥ ५॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V06 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = अकारादेस्तथा शान्तातिशान्तान्तस्य देवताः । | |||
| verse_lines = अकारादेस्तथा शान्तातिशान्तान्तस्य देवताः ।¦एवमुक्त्वा तु तद्ध्यानं ब्रूयाच्छिष्याय सद्गुरुः॥ ६॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V07 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = अष्टपत्रे तु हृत्पद्मे मध्ये सूर्येन्दुवह्निगम् । | |||
| verse_lines = अष्टपत्रे तु हृत्पद्मे मध्ये सूर्येन्दुवह्निगम् ।¦पीठं तत्पद्ममध्यस्थं नारायणमनामयम्॥ ७॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V08 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = उद्यदादित्यसङ्काशं तेजसानुपमं सदा । | |||
| verse_lines = उद्यदादित्यसङ्काशं तेजसानुपमं सदा ।¦सहस्रेणापि सूर्याणां सञ्ज्ञानानन्दरूपिणम्॥ ८॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V09 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = अतिरक्ततलं भास्वन्नखव्रातविभूषितम् वृत्तजङ्घं वृत्तजानुं हस्तिहस्तोरुमीश्वरम्॥ ९॥ | |||
| verse_lines = अतिरक्ततलं भास्वन्नखव्रातविभूषितम् वृत्तजङ्घं वृत्तजानुं हस्तिहस्तोरुमीश्वरम्॥ ९॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V10 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = महाकटितटाबद्धकाञ्चीपीताम्बरोज्ज्वलम् । | |||
| verse_lines = महाकटितटाबद्धकाञ्चीपीताम्बरोज्ज्वलम् ।¦सुनिम्ननाभिं त्रिवलिं सुवृत्तोदरबन्धनम्॥ १०॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V11 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = विशालवक्षसं भ्राजत्कौस्तुभामुक्तकन्धरम् । | |||
| verse_lines = विशालवक्षसं भ्राजत्कौस्तुभामुक्तकन्धरम् ।¦वनमालाधरं हारवैजयन्त्यादिभिर्युतम्॥ ११॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V12 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = पृथुदीर्घचतुर्बाहुं शङ्खचक्रगदाम्बुजैः । | |||
| verse_lines = पृथुदीर्घचतुर्बाहुं शङ्खचक्रगदाम्बुजैः ।¦युक्तमुन्निद्रपद्माक्षं स्फुरन्मकरकुण्डलम्॥ १२॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V13 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = पूर्णचन्द्रायुतोद्रिक्तकान्तिमन्मुखपङ्कजम् । | |||
| verse_lines = पूर्णचन्द्रायुतोद्रिक्तकान्तिमन्मुखपङ्कजम् ।¦सुभ्रुवं सुललाटान्तं किरीटाबद्धमूर्धजम्॥ १३॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V14 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = निःशेषदुःखदमनं नित्यानन्दशुचिस्मितम् । | |||
| verse_lines = निःशेषदुःखदमनं नित्यानन्दशुचिस्मितम् ।¦विश्वादींश्चैव कृष्णादीनेवं भूतान्सनातनान्॥ १४॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V15 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = अभिन्नानेव सततं तस्माद्विष्णोः परात्मनः । | |||
| verse_lines = अभिन्नानेव सततं तस्माद्विष्णोः परात्मनः ।¦वराभयोद्यतकरान्नित्यानन्दैकरूपिणः॥ १५॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V16 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = एवमुक्त्वा गुरुर्ध्यानं शपथं कारयेत्ततः । | |||
| verse_lines = एवमुक्त्वा गुरुर्ध्यानं शपथं कारयेत्ततः ।¦न विष्णुं वैष्णवांश्चैव विसृजेयमिति त्रिशः॥ १६॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V17 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = न चान्यदेवतासाम्यं तदैक्यमथवा हरेः । | |||
| verse_lines = न चान्यदेवतासाम्यं तदैक्यमथवा हरेः ।¦चिन्तयेयं मृतो वापि न चाप्येकत्ववादिभिः॥ १७॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V18 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = समत्ववादिभिर्वाहं सङ्गच्छेयं कदाचन । | |||
| verse_lines = समत्ववादिभिर्वाहं सङ्गच्छेयं कदाचन ।¦तन्निन्दकैश्च तद्भक्तनिन्दकैर्वा महामुने॥ १८॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V19 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = एवं कृते तु शपथे मस्तके हस्तपङ्कजम् । | |||
| verse_lines = एवं कृते तु शपथे मस्तके हस्तपङ्कजम् ।¦निधायोत्तीर्य संसारात्सुखी भव हरेः प्रियः॥ १९॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V20 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = सर्वदुःखादिभिर्मुक्तो नित्यानन्दैकरूपकः । | |||
| verse_lines = सर्वदुःखादिभिर्मुक्तो नित्यानन्दैकरूपकः ।¦सम्प्राप्य विष्णुसामीप्यं तत्रापि हरिभक्तिमान्॥ २०॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V21 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = भक्तिमांश्चान्यदेवेषु तारतम्यं च संस्मरन् । | |||
| verse_lines = भक्तिमांश्चान्यदेवेषु तारतम्यं च संस्मरन् ।¦सर्वोत्कर्षं स्मरन्विष्णोर्भूयाश्चैव सदा सुखी॥ २१॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V22 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = न मुक्तौ विष्णुनैक्यं वा मुक्तानां साम्यमेव वा । | |||
| verse_lines = न मुक्तौ विष्णुनैक्यं वा मुक्तानां साम्यमेव वा ।¦स्मरेथा इति चोक्त्वाथ समयाननुशिक्षयेत्॥ २२॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V23 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = नित्यशश्च हरेः पूजा जपध्यानसमर्पणम् । | |||
| verse_lines = नित्यशश्च हरेः पूजा जपध्यानसमर्पणम् ।¦कर्तव्यं तु त्वया वत्स जपश्च त्रिसहस्रकः॥ २३॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V24 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = मध्यमः प्रणवस्योक्तो योवरः स सहस्रकः । | |||
| verse_lines = मध्यमः प्रणवस्योक्तो योवरः स सहस्रकः ।¦त्रिसहस्रात्परो यस्तु स उत्तमजपः ---स्मृतः॥ २४॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V25 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = आत्मानं प्रतिबिम्बत्वे ध्यायन् बिम्बं जनार्दनम् । | |||
| verse_lines = आत्मानं प्रतिबिम्बत्वे ध्यायन् बिम्बं जनार्दनम् ।¦ध्यायस्व सततं वत्स सपर्यां नित्यशः कुरु॥ २५॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V26 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = मानसैर्वाथ पुष्पैर्वा प्रणवेन समाहितः । | |||
| verse_lines = मानसैर्वाथ पुष्पैर्वा प्रणवेन समाहितः ।¦अन्यांश्च वैष्णवान्मन्त्राञ्जपेथा भक्तिपूर्वकम्॥ २६॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V27 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = शृृणुष्व वैष्णवं शास्त्रं सदा वेदार्थतत्परः । | |||
| verse_lines = शृृणुष्व वैष्णवं शास्त्रं सदा वेदार्थतत्परः ।¦वेदान्मन्त्रानुपनिषत्सहितान्सर्वदा शृृणु॥ २७॥ | |||
}} | |||
{{VerseBlock | |||
| document_id = YPK | |||
| chapter_id = YPK_C01 | |||
| verse_id = YPK_C01_V28 | |||
| verse_type = mantra | |||
| verse_text = इतिहासपुराणं च पञ्चरात्रं तथैव च । | |||
| verse_lines = इतिहासपुराणं च पञ्चरात्रं तथैव च ।¦तदर्थान् ब्रह्मसूत्रैश्च सम्यङ्निर्णीय तत्त्वतः ।¦विष्णोः सर्वोत्तमत्त्वं च सर्वदा प्रतिपादय॥ २८॥ | |||
}} | |||
[[Category:Yatipranavavakalpa]] | [[Category:Yatipranavavakalpa]] | ||
[[Category:Moola]] | [[Category:Moola]] | ||
Revision as of 20:54, 16 June 2026
यतिप्रणवकल्पः — मूलम्
समिच्चर्वाज्यकान्हुत्वा सम्यक्पुरुषसूक्ततः ।
श्रुत्वा भागवतं शुद्धमाचार्यं शरणं व्रजेत् ।
उच्चारयेत्त्रिशस्तारं दक्षिणे श्रवणे तथा ।
अन्तर्यामीति गायत्री परमात्मेत्यनुक्रमात् ।
कृष्णो रामो नृसिंहश्च वराहो विष्णुरेव च ।
अकारादेस्तथा शान्तातिशान्तान्तस्य देवताः ।
अष्टपत्रे तु हृत्पद्मे मध्ये सूर्येन्दुवह्निगम् ।
उद्यदादित्यसङ्काशं तेजसानुपमं सदा ।
अतिरक्ततलं भास्वन्नखव्रातविभूषितम् वृत्तजङ्घं वृत्तजानुं हस्तिहस्तोरुमीश्वरम्॥ ९॥
महाकटितटाबद्धकाञ्चीपीताम्बरोज्ज्वलम् ।
विशालवक्षसं भ्राजत्कौस्तुभामुक्तकन्धरम् ।
पृथुदीर्घचतुर्बाहुं शङ्खचक्रगदाम्बुजैः ।
पूर्णचन्द्रायुतोद्रिक्तकान्तिमन्मुखपङ्कजम् ।
निःशेषदुःखदमनं नित्यानन्दशुचिस्मितम् ।
अभिन्नानेव सततं तस्माद्विष्णोः परात्मनः ।
एवमुक्त्वा गुरुर्ध्यानं शपथं कारयेत्ततः ।
न चान्यदेवतासाम्यं तदैक्यमथवा हरेः ।
समत्ववादिभिर्वाहं सङ्गच्छेयं कदाचन ।
एवं कृते तु शपथे मस्तके हस्तपङ्कजम् ।
सर्वदुःखादिभिर्मुक्तो नित्यानन्दैकरूपकः ।
भक्तिमांश्चान्यदेवेषु तारतम्यं च संस्मरन् ।
न मुक्तौ विष्णुनैक्यं वा मुक्तानां साम्यमेव वा ।
नित्यशश्च हरेः पूजा जपध्यानसमर्पणम् ।
मध्यमः प्रणवस्योक्तो योवरः स सहस्रकः ।
आत्मानं प्रतिबिम्बत्वे ध्यायन् बिम्बं जनार्दनम् ।
मानसैर्वाथ पुष्पैर्वा प्रणवेन समाहितः ।
शृृणुष्व वैष्णवं शास्त्रं सदा वेदार्थतत्परः ।
इतिहासपुराणं च पञ्चरात्रं तथैव च ।