BramhasutraBhashyam/C01/S01: Difference between revisions
No edit summary |
|||
| Line 5: | Line 5: | ||
| chapter_num = 0101 | | chapter_num = 0101 | ||
| title = प्रथमः पादः | | title = प्रथमः पादः | ||
| intro = <div style="font-family:'Adishila',serif; font-size:1.75rem; line-height:1.9;margin:4px 0;">नारायणं गुणैः सर्वैरुदीर्णं दोषवर्जितम् । | | intro = <div style="font-family:'Adishila',serif; font-size: 1.75rem;line-height:1.9;margin:4px 0;">नारायणं गुणैः सर्वैरुदीर्णं दोषवर्जितम् । | ||
ज्ञेयं गम्यं गुरूंश्चापि नत्वा सूत्रार्थ उच्यते ॥</div> | ज्ञेयं गम्यं गुरूंश्चापि नत्वा सूत्रार्थ उच्यते ॥</div> | ||
<div style="font-family:'Adishila',serif;font-size:1. | <div style="font-family:'Adishila',serif;font-size: 1.5rem;line-height:1.9;margin:4px 0;">द्वापरे सर्वत्र ज्ञान आकुलीभूते तन्निर्णयाय ब्रह्मरुद्रेन्द्रादिभिरर्थितो भगवान् नारायणो व्यासत्वेनावततार । अथेष्टानिष्टप्राप्तिपरिहारेच्छूनां तद्योगमविजानतां तज्ज्ञापनार्थं वेदमुत्सन्नं व्यञ्जयंश्चतुर्धा व्यभजत्। चतुर्विंशतिधैकशतधा सहस्रधा द्वादशधा च । तदर्थनिर्णयाय ब्रह्मसूत्राणि चकार ।</div> | ||
<div style="font-family:'Adishila',serif;font-size:1. | <div style="font-family:'Adishila',serif;font-size: 1.5rem;line-height:1.9;margin:4px 0;">तच्चोक्तं स्कान्दे –</div> | ||
<blockquote style="font-family:'Adishila',serif; font-size:1. | <blockquote style="font-family:'Adishila',serif;font-size: 1.5rem;font-style:italic;border-left:3px solid #c9a84c;padding:4px 12px;margin:6px 0;background:#faf3e0;">नारायणाद्विनिष्पन्नं ज्ञानं कृतयुगे स्थितम् । | ||
किञ्चित् तदन्यथा जातं त्रेतायां द्वापरेऽखिलम् ॥<br> | किञ्चित् तदन्यथा जातं त्रेतायां द्वापरेऽखिलम् ॥<br> | ||
गौतमस्य ऋषेः शापार्ज्ज्ञाने त्वज्ञानतां गते । | गौतमस्य ऋषेः शापार्ज्ज्ञाने त्वज्ञानतां गते । | ||
| Line 35: | Line 35: | ||
}} | }} | ||
== = जिज्ञासाधिकरणम् = == | === जिज्ञासाधिकरणम् === | ||
{{VerseBlock | {{VerseBlock | ||
| Line 48: | Line 48: | ||
}} | }} | ||
== = जन्माधिकरणम् = == | === जन्माधिकरणम् === | ||
{{VerseBlock | {{VerseBlock | ||
| Line 61: | Line 61: | ||
}} | }} | ||
== = शास्त्रयोनित्वाधिकरणम् = == | === शास्त्रयोनित्वाधिकरणम् === | ||
{{VerseBlock | {{VerseBlock | ||
| Line 74: | Line 74: | ||
}} | }} | ||
== = समन्वयाधिकरणम् = == | === समन्वयाधिकरणम् === | ||
{{VerseBlock | {{VerseBlock | ||
| Line 87: | Line 87: | ||
}} | }} | ||
==ईक्षत्यधिकरणम्== | === ईक्षत्यधिकरणम् === | ||
{{VerseBlock | {{VerseBlock | ||
| Line 166: | Line 166: | ||
}} | }} | ||
== = आनन्दमयाधिकरणम् = == | === आनन्दमयाधिकरणम् === | ||
{{VerseBlock | {{VerseBlock | ||
| Line 256: | Line 256: | ||
}} | }} | ||
== = अन्तःस्तत्थ्वाधिकरणम् = == | === अन्तःस्तत्थ्वाधिकरणम् === | ||
{{VerseBlock | {{VerseBlock | ||
| Line 280: | Line 280: | ||
}} | }} | ||
== = आकाशाधिकरणम् = == | === आकाशाधिकरणम् === | ||
{{VerseBlock | {{VerseBlock | ||
| Line 293: | Line 293: | ||
}} | }} | ||
== = प्राणाधिकरणम् = == | === प्राणाधिकरणम् === | ||
{{VerseBlock | {{VerseBlock | ||
| Line 306: | Line 306: | ||
}} | }} | ||
== = ज्योतिरधिकरणम् = == | === ज्योतिरधिकरणम् === | ||
{{VerseBlock | {{VerseBlock | ||
| Line 319: | Line 319: | ||
}} | }} | ||
== = गायत्र्यधिकरणम् = == | === गायत्र्यधिकरणम् === | ||
{{VerseBlock | {{VerseBlock | ||
| Line 354: | Line 354: | ||
}} | }} | ||
== = पादान्त्यप्राणाधिकरणम् = == | === पादान्त्यप्राणाधिकरणम् === | ||
{{VerseBlock | {{VerseBlock | ||
Revision as of 08:09, 17 March 2026
प्रथमाध्याये प्रथमः पादः
जिज्ञासाधिकरणम्
ॐ ॐअथातो ब्रह्मजिज्ञासा ॐ ॥ 01-01 ॥
जन्माधिकरणम्
ॐ जन्माद्यस्य यतः ॐ ॥ 02-02 ॥
शास्त्रयोनित्वाधिकरणम्
ॐ शास्त्रयोनित्वात् ॐ ॥ 03-03 ॥
समन्वयाधिकरणम्
ॐ तत्तु समन्वयात् ॐ ॥ 04-04 ॥
ईक्षत्यधिकरणम्
ॐ ईक्षतेर्नाशब्दम् ॐ ॥ 05-05 ॥
ॐ गौणश्चेन्नात्मशब्दात् ॐ ॥ 06-06 ॥
ॐ तन्निष्ठस्य मोक्षोपदेशात् ॐ ॥ 07-07 ॥
ॐ हेयत्वावचनाच्च ॐ ॥ 08-08 ॥
ॐ स्वाप्ययात् ॐ ॥ 09-09 ॥
ॐ गतिसामान्यात् ॐ ॥ 10-10 ॥
ॐ श्रुतत्वाच्च ॐ ॥ 11-11 ॥
आनन्दमयाधिकरणम्
ॐ आनन्दमयोऽभ्यासात् ॐ ॥ 12-12 ॥
ॐ विकारशब्दान्नेति चेन्न प्राचुर्यात् ॐ ॥ 13-13 ॥
ॐ तद्धेतुव्यपदेशाच्च ॐ ॥ 14-14 ॥
ॐ मान्त्रवर्णिकमेव च गीयते ॐ ॥ 15-15 ॥
ॐ नेतरोऽनुपपत्तेः ॐ ॥ 16-16 ॥
ॐ भेदव्यपदेशाच्च ॐ ॥ 17-17 ॥
ॐ कामाच्च नानुमानापेक्षा ॐ ॥ 18-18 ॥
ॐ अस्मिन्नस्य च तद्योगं शास्ति ॐ ॥ 19-19 ॥
अन्तःस्तत्थ्वाधिकरणम्
ॐ अन्तस्तद्धर्मोपदेशात् ॐ ॥ 20-20 ॥
ॐ भेदव्यपदेशाच्चान्यः ॐ ॥ 21-21 ॥
आकाशाधिकरणम्
ॐ आकाशस्तल्लिङ्गात् ॐ ॥ 22-22 ॥
प्राणाधिकरणम्
ॐ अत एव प्राणः ॐ ॥ 23-23 ॥
ज्योतिरधिकरणम्
ॐ ज्योतिश्चरणाभिधानात् ॐ ॥ 24-24 ॥
गायत्र्यधिकरणम्
ॐ छन्दोऽभिधानान्नेति चेन्न तथा चेतोऽर्पणनिगदात् तथा हि दर्शनम् ॐ॥ 25-25 ॥
ॐ भूतादिपादव्यपदेशोपपत्तेश्चैवम् ॐ ॥ 26-26 ॥
ॐ उपदेशभेदान्नेति चेन्नोभयस्मिन्नप्यविरोधात् ॐ ॥ 27-27॥
पादान्त्यप्राणाधिकरणम्
ॐ प्राणस्तथाऽनुगमात् ॐ ॥ 28-28 ॥
ॐ न वक्तुरात्मोपदेशादिति चेदध्यात्मसम्भन्धभूमा ह्यस्मिन् ॐ ॥ 29-29 ॥
ॐ शास्त्रदृष्ट्यातूपदेशो वामदेववत् ॐ ॥ 30-30 ॥
ॐ जीवमुख्यप्राणलिङ्गान्नेति चेन्नोपासात्रैविध्यादाश्रितत्वादिह तद्योगात् ॐ ॥ 31-31 ॥