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| text | "वन्दे वन्द्यं सदानन्दं वासुदेवं निरञ्जनम् ।
इन्दिरापतिमाद्यादिवरदेश वरप्रदम् ॥1॥" |
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| text | "नमामि निखिलाधीशकिरीटाघृष्टपीठवत् ।
हृत्तमःशमनेर्काभं श्रीपतेः पादपङ्कजम् ॥2॥" |
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| text | "जाम्बूनदाम्बराधारं नितम्बं चिन्त्यमीशितुः ।
स्वर्णमञ्जीरसंवीतमारूढं जगदम्बया ॥3॥" |
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| text | "उदरं चिन्त्यमीशस्य तनुत्वेप्यखलिम्भरम् ।
वलित्रयाङ्कितं नित्यमुपगूढं श्रियैकया ॥4॥" |
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| text | "स्मरणीयमुरो विष्णोरिन्दिरावासमीशितुः ।
अनन्तमन्तवदिव भुजयोरन्तरं गतम् ॥5॥" |
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| text | "शङ्खचक्रगदापद्मधराश्चिन्त्या हरेर्भुजाः ।
पीनवृत्ता जगद्रक्षाकेवलोद्योगिनोनिशम् ॥6॥" |
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| text | "सन्ततं चिन्तयेत् कण्ठं भास्वत्कौस्तुभभासकम् ।
वैकुण्ठस्याखिला वेदा उद्गीर्यन्तेनिशं यतः ॥7॥" |
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| text | "स्मरेत यामिनीनाथसहस्रामितकान्तिमत् ।
भवतापापनोदीड्यं श्रीपतेर्मुखपङ्कजम् ॥8॥" |
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| text | "पूर्णानन्दसुखोद्भासि मन्दस्मितमधीशितुः ।
गोविन्दस्य सदा चिन्त्यं नित्यानन्दपदप्रदम् ॥9॥" |
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| text | "स्मरामि भवसन्तापहानिदामृतसागरम् ।
पूर्णानन्दस्य रामस्य सानुरागावलोकनम् ॥10॥" |
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भ्रूभङ्गं पारमेष्ठ्यादिपददायि विमुक्तिदम् ॥11॥" |
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| text | "सन्ततं चिन्तयेनन्तमन्तकाले विशेषतः ।
नैवोदापुर्गृणन्तोन्तं यद्गुणानामजादयः ॥12॥" |
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| text | "सुजनोदधिसंवृद्धिपूर्णचन्द्रो गुणार्णवः ।
अमन्दानन्दसान्द्रो नः प्रीयतामिन्दिरापतिः ॥1॥" |
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| text | "रमाचकोरीविधवे दुष्टदर्पोदवह्नये ।
सत्पान्थजनगेहाय नमो नारायणाय ते ॥2॥" |
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| text | "चिदचिद्भेदमखलिं विधायादाय भुञ्जते ।
अव्याकृतगृहस्थाय रमाप्रणयिने नमः ॥3॥" |
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| text | "अमन्दागुणसारोपि मन्दहासेन वीक्षितः ।
नित्यमिन्दिरयानन्दसान्द्रो यो नौमि तं हरिम् ॥4॥" |
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| text | "वशी वशे न कस्यापि योजितो विजिताखिलः ।
सर्वकर्ता न क्रियते तं नमामि रमापतिम् ॥5॥" |
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| text | "अगुणाय गुणोद्रेकस्वरूपायादिकारिणे ।
विदारितारिसङ्घाय वासुदेवाय ते नमः ॥6॥" |
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| text | "आदिदेवाय देवानां पतये सादितारये ।
अनाद्यज्ञानपाराय नमो वरवराय ते ॥7॥" |
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| text | "अजाय जनयित्रेस्य विजिताखलिदानव ।
अजादिपूज्यपादाय नमस्ते गरुडध्वज ॥8॥" |
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| text | "इन्दिरामन्दसान्द्राग्य्रकटाक्षप्रेक्षितात्मने ।
अस्मदिष्टैककार्याय पूर्णाय हरये नमः ॥9॥" |
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| text | "कुरु भुङ्क्ष्व च कर्म निजं नियतं हरिपादविनम्रधिया सततम् ।
हरिरेव परो हरिरेव गुरुः हरिरेव जगत्पितृमातृगतिः ॥1॥" |
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| text | "न ततोस्त्परं जगतीड्यतमं परमात् परतः पुरुषोत्तमतः ।
तदलं बहुलोकविचिन्तनया प्रवणं कुरु मानसमीशपदे ॥2॥" |
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| text | "यततोपि हरेः पदसंस्मरणे सकलं ह्यघमाशु लयं व्रजति ।
स्मरतस्तु विमुक्तिपदं परमं स्फुटमेष्यति तत्किमपाक्रियते ॥3॥" |
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| text | "श?ृणुतामलसत्यवचः परमं शपथेरितमुच्छ्रितबाहुयुगम् ।
न हरेः परमो न हरेः सदृशः परमः स तु सर्वचिदात्मगणात् ॥4॥" |
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| text | "यदि नाम परो न भवेत् स हरिः कथमस्य वशे जगदेतदभूत् ।
यदि नाम न तस्य वशे सकलं कथमेव तु नित्यसुखं न भवेत् ॥5॥" |
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| text | "न कर्मविमामलकालगुणप्रभृतीशमचित्तनु तद्धि यतः ।
चिदचित्तनु सर्वमसौ तु हरिर्यमयेदिति वैदिकमस्ति वचः ॥6॥" |
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| text | "व्यवहारभिदापि गुरोर्जगतां न तु चित्तगता स हि चोद्यपरम् ।
बहवः पुरुषाः पुरुषप्रवरो हरिरित्यवदत् स्वयमेव हरिः ॥7॥" |
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| text | "चतुराननपूर्वविमुक्तगणा हरिमेत्य तु पूर्ववदेव सदा ।
नियतोच्चविनीचतयैव निजां स्थितिमापुरिति स्म परं वचनम् ॥8॥" |
|---|
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| text | "आनन्दतीर्थसन्नाम्ना पूर्णप्रज्ञाभिधायुजा ।
कृतं हर्यष्टकं भक्त्या पठतः प्रियते हरिः ॥9॥" |
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| chapter | "DDS_C04" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "निजपूर्णसुखामितबोधतनुः परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।
अजरारमरणः सकलार्तिहरः कमलापतिरीड्यतमोवतु नः ॥1॥" |
|---|
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| text | "यदसुप्तिगतोपि हरिः सुखवान् सुखरूपिणमाहुरतो निगमाः ।
स्वमतिप्रभवं जगदस्य यतः परबोधतनुं च ततः खपतिम् ॥2॥" |
|---|
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| text | "बहुचित्रजगद्बहुधाकरणात् परशक्तिरनन्तगुणः परमः ।
सुखरूपममुष्य पदं परमं स्मरतस्तु भविष्यति तत्सततम् ॥3॥" |
|---|
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| text | "स्मरणे हि परेशितुरस्य विभोर्मलिनानि मनांसि कुतः करणम् ।
विमलं हि पदं परमं स्वरतं तरुणार्कसवर्णमजस्य हरेः ॥4॥" |
|---|
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| id | "Dwadasha-35" |
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| text | "विमलैः श्रुतिशाणनिशाततमैः सुमनोसिभिराशु निहत्य दृढम् ।
बलिनं निजवैरिणमात्मतमोभिदमीशमनन्तमुपास्व हरिम् ॥5॥" |
|---|
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| text | "स हि विश्वसृजो विभुशम्भुपुरन्दरसूर्यमुखानपरानमरान् ।
सृजतीड्यतमोवति हन्ति निजं पदमापयति प्रणतान्सुधिया ॥6॥" |
|---|
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| text | "परमोपि रमेशितुरस्य समो न हि कश्चिदभून्न भविष्यति च ।
क्वचिदद्यतनोपि न पूर्णसदागणितेड्यगुणानुभवैकतनोः ॥7॥" |
|---|
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| id | "Dwadasha-38" |
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| text | "इति देववरस्य हरेः स्तवनं कृतवान् मुनिरुत्तममादरतः ।
सुखतीर्थापदाभिहितः पठतस्तदिदं भवति ध्रुवमुच्चसुखम् ॥8॥" |
|---|
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| id | "Dwadasha-39" |
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| chapter | "DDS_C05" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "वासुदेवापरिमेयसुधामन् शुद्धसदोदित सुन्दरीकान्त ।
धराधरधारणवेधुरधर्तः सौधृतिदीधितिवेधृविधातः ॥1॥" |
|---|
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| id | "Dwadasha-40" |
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| chapter | "DDS_C05" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "अधिक बन्धं रन्धय बोधाच्छिन्धि पिधानं बन्धुरमद्धा ।
केशव केशव शासक वन्दे पाशधरार्चित शूरवरेश ॥2॥" |
|---|
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| id | "Dwadasha-41" |
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| chapter | "DDS_C05" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "नारायणामल कारण वन्दे कारण कारण पूर्णवरेण्य ।
माधव माधव साधक वन्दे बाधक बोधक शुद्धसमाधे ॥3॥" |
|---|
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| id | "Dwadasha-42" |
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| chapter | "DDS_C05" |
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| verseType | "mantra" |
|---|
| text | "गोविन्द गोविन्द पुरन्दर वन्दे स्कन्दसुनन्दनवन्दितपाद ।
विष्णो सृजिष्णो ग्रसिष्णो विवन्दे कृष्ण सदुष्णवधिष्णो सुधृष्णो ॥4॥" |
|---|
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| id | "Dwadasha-43" |
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| chapter | "DDS_C05" |
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| verseType | "mantra" |
|---|
| text | "मधुसूदन दानवसादन वन्दे दैवतमोदित वेदितपाद ।
त्रिविक्रम निष्क्रम विक्रम वन्दे सङ्क्रम सुक्रम हुङ्कृतवक्त्र ॥5॥" |
|---|
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| id | "Dwadasha-44" |
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| chapter | "DDS_C05" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "वामन वामन भामन वन्दे सामन सीमन सामन सानो ।
श्रीधर श्रीधर शन्धर वन्दे भूधर वार्धर कन्धरधारिन् ॥6॥" |
|---|
|
| id | "Dwadasha-45" |
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| chapter | "DDS_C05" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "हृषीकेश सुकेश परेश विवन्दे शरणेश कलेश बलेश सुखेश ।
पद्मनाभ शुभोद्भव वन्दे सम्भृतलोकभराभर भूरे ।
दामोदर दूरतरान्तर वन्दे दारितपारगपाद परस्मात् ॥7॥" |
|---|
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| id | "Dwadasha-46" |
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| text | "आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगीतिरियं परमादरतः ।
परलोकवलिोकनसूर्यनिभा हरिभक्तिविवर्धनशौण्डतमा ॥8॥" |
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| id | "Dwadasha-47" |
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| chapter | "DDS_C06" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "मत्स्यकरूप लयोदविहारिन् वेदविनेत्र चतुर्मुखवन्द्य ।
कूर्मस्वरूपक मन्दरधारिन् लोकविधारक देववरेण्य ॥1॥" |
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| id | "Dwadasha-48" |
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| chapter | "DDS_C06" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "सूकररूपक दानवशत्रो भूमिविधारक यज्ञवराङ्ग ।
देव नृसिंह हिरण्यकशत्रो सर्वभयान्तक दैवतबन्धो ॥2॥" |
|---|
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| id | "Dwadasha-49" |
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| chapter | "DDS_C06" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "वामन वामन माणववेष दैत्यवरान्तक कारणरूप ।
राम भृगूद्वह सूर्जितदीप्ते क्षत्रकुलान्तक शम्भुवरेण्य ॥3॥" |
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| chapter | "DDS_C06" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "राघव राघव राक्षसशत्रो मारुतिवल्लभ जानकिकान्त ।
देवकिनन्दन सुन्दररूप रुक्मिणिवल्लभ पाण्डवबन्धो ॥4॥" |
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| text | "देवकिनन्दन नन्दकुमार वृन्दावनाञ्चन गोकुलचन्द्र ।
कन्दफलाशन सुन्दररूप नन्दितगोकुलवन्दितपाद ॥5॥" |
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| text | "इन्द्रसुतावक नन्दकहस्त चन्दनचर्चित सुन्दरिनाथ ।
इन्दीवरोदरदलनयन मन्दरधारिन् गोविन्द वन्दे ॥6॥" |
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| text | "चन्द्रशतानन कुन्दसुहास नन्दितदैवतानन्दसुपूर्ण ।
दैत्यविमोहक नित्यसुखादे देवसुबोधक बुद्धस्वरूप ॥7॥" |
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| text | "दुष्टकुलान्तक कल्किस्वरूप धर्मविवर्धन मूलयुगादे ।
नारायणामलकारणमूर्ते पूर्णगुणार्णव नित्यसुबोध ॥8॥" |
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| text | "आनन्दतीर्थमुनीन्द्रकृता हरिगाथा ।
पापहरा शुभा नित्यसुखार्था ॥9॥" |
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| text | "विश्वस्थितिप्रलयसर्गमहाविभूतिवृत्तिप्रकाशनियमावृतिबन्धमोक्षाः ।
यस्या अपाङ्गलवमात्रत ऊर्जिता सा श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥1॥" |
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| text | "ब्रह्मेशशक्ररविधर्मशशाङ्कपूर्वगीर्वाणसन्ततिरियं यदपाङ्गलेशम् ।
आश्रित्य विश्वविजयं विसृजत्यचिन्त्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥2॥" |
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| text | "धर्मार्थकामसुमतिप्रचयाद्यशेषसन्मङ्गलं विदधते यदपाङ्गलेशम् ।
आश्रित्य तत्प्रणतसत्प्रणता अपीड्या श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥3॥" |
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| text | "षड्वर्गनिग्रहनिरस्तसमस्तदोषा ध्यायन्ति विष्णुमृषयो यदपाङ्गलेशम् ।
आश्रित्य यानपि समेत्य न याति दुःखं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥4॥" |
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| text | "शेषाहिवैरिशिवशक्रमनुप्रधानचित्रोरुकर्मरचनं यदपाङ्गलेशम् ।
आश्रित्य विश्वमखलिं विदधाति धाता श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥5॥" |
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| chapter | "DDS_C07" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "शक्रोग्रदीधितिहिमाकरसूर्यसूनुपूर्वं निहत्य निखलिं यदपाङ्गलेशम् ।
आश्रित्य नृत्यति शिवः प्रकटोरुशक्तिः श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥6॥" |
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| chapter | "DDS_C07" |
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| text | "तत्पादपङ्कजमहासनतामवाप शर्वादिवन्द्यचरणो यदपाङ्गलेशम् ।
आश्रित्य नागपतिरन्यसुरैर्दुरापां श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥7॥" |
|---|
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| chapter | "DDS_C07" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "नागारिरुग्रबलपौरुष आप विष्णोर्वाहत्वमुत्तमजवो यदपाङ्गलेशम् ।
आश्रित्य शक्रमुखदेवगणैरचिन्त्यं श्रीर्यत्कटाक्षबलवत्यजितं नमामि ॥8॥" |
|---|
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| chapter | "DDS_C07" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "आनन्दतीर्थमुनिसन्मुखपङ्कजोत्थं साक्षाद्रमाहरिमनःप्रियमुत्तमार्थम् ।
भक्त्या पठत्यजितमात्मनि सन्निधाय यः स्तोत्रमेतदभियाति तयोरभीष्टम् ॥9॥" |
|---|
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| chapter | "DDS_C08" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "वन्दिताशेषवन्द्योरुवृन्दारकं चन्दनाचर्चितोदारपीनांसकम् ।
इन्दिराचञ्चलापाङ्गनीराजितं मन्दरोद्धारिवृत्तोद्भुजाभोगिनम् ।
प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥1॥" |
|---|
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| chapter | "DDS_C08" |
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| text | "सृष्टिसंहारलीलावलिासाततं पुष्टषाड्गुण्यसद्विग्रहोल्लासिनम् ।
दुष्टनिश्शेषसंहारकर्मोद्यतं हृष्टपुष्टानुशिष्टप्रजासंश्रयम् ।
प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥2॥" |
|---|
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| chapter | "DDS_C08" |
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| text | "उन्नतप्रार्थिताशेषसंसाधकं सन्नतालौकिकानन्ददश्रीपदम् ।
भिन्नकर्माशयप्राणिसम्प्रेरकं तन्न किं नेति विद्वत्सु मीमांसितम् ।
प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥3॥" |
|---|
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| chapter | "DDS_C08" |
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| text | "विप्रमुख्यैः सदा वेदवादोन्मुखैः सुप्रतापैः क्षितिशेश्वरैश्चार्चितम् ।
अप्रतर्क्योरुसंविद्गुणं निर्मलं सप्रकाशाजरानन्दरूपं परम् ।
प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥4॥" |
|---|
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| chapter | "DDS_C08" |
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| text | "अत्ययो यस्य केनापि न क्वापि हि प्रत्ययो यद्गुणेषूत्तमानां परः ।
सत्यसङ्कल्प एको वरेण्यो वशी मत्यनूनैः सदा वेदवादोदितः ।
प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥5॥" |
|---|
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| chapter | "DDS_C08" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "पश्यतां दुःखसन्ताननिर्मूलनं दृश्यतां दृश्यतामित्यजेशार्चितम् ।
नश्यतां दूरगं सर्वदाप्यात्मगं वश्यतां स्वेच्छया सज्जनेष्वागतम् ।
प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥6॥" |
|---|
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| chapter | "DDS_C08" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "अग्रजं यः ससर्जाजमग्र्याकृतिं विग्रहो यस्य सर्वे गुणा एव हि ।
उग्र आद्योपि यस्यात्मजाग्य्रात्मजः सद्गृहीतः सदा यः परं दैवतम् ।
प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥7॥" |
|---|
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| chapter | "DDS_C08" |
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| verseType | "mantra" |
|---|
| text | "अच्युतो यो गुणैर्नित्यमेवाखिलैः प्रच्युतोशेषदोषैः सदा पूर्तितः ।
उच्यते सर्ववेदोरुवादैरजः स्वर्चितो ब्रह्मरुद्रेन्द्रपूर्वैः सदा ।
प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥8॥" |
|---|
|
| id | "Dwadasha-73" |
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| chapter | "DDS_C08" |
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| verseType | "mantra" |
|---|
| text | "धार्यते येन विश्वं सदाजादिकं वार्यतेशेषदुःखं निजध्यायिनाम् ।
पार्यते सर्वमन्यैर्न यत्पार्यते कार्यते चाखिलं सर्वभूतैः सदा ।
प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥9॥" |
|---|
|
| id | "Dwadasha-74" |
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| chapter | "DDS_C08" |
|---|
| verseType | "mantra" |
|---|
| text | "सर्वपापानि यत्संस्मृतेः सङ्क्षयं सर्वदा यान्ति भक्त्या विशुद्धात्मनाम् ।
शर्वगुर्वादिगीर्वाणसंस्थानदः कुर्वते कर्म यत्प्रीतये सज्जनाः ।
प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥10॥" |
|---|
|
| id | "Dwadasha-75" |
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| chapter | "DDS_C08" |
|---|
| verseType | "mantra" |
|---|
| text | "अक्षयं कर्म यस्मिन् परे स्वर्पितं प्रक्षयं यान्ति दुःखानि यन्नामतः ।
अक्षरो योजरः सर्वदैवामृतः कुक्षिगं यस्य विश्वं सदाजादिकम् ।
प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥11॥" |
|---|
|
| id | "Dwadasha-76" |
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| chapter | "DDS_C08" |
|---|
| verseType | "mantra" |
|---|
| text | "नन्दितीर्थोरुसन्नामिनो नन्दिनः सन्दधानाः सदानन्ददेवे मतिम् ।
मन्दहासारुणापाङ्गदत्तोन्नतिं नन्दिताशेषदेवादिवृन्दं सदा ।
प्रीणयामो वासुदेवं देवतामण्डलाखण्डमण्डनं प्रीणयामो वासुदेवम् ॥12॥" |
|---|
|
| id | "Dwadasha-77" |
|---|
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| chapter | "DDS_C09" |
|---|
| verseType | "mantra" |
|---|
| text | "अतिमत तमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनलिय ।
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥1॥" |
|---|
|
| id | "Dwadasha-78" |
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| chapter | "DDS_C09" |
|---|
| verseType | "mantra" |
|---|
| text | "विधिभवमुखसुरसततसुवन्दित रमामनोहर भव मम शरणम् ।
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥2॥" |
|---|
|
| id | "Dwadasha-79" |
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|---|
| chapter | "DDS_C09" |
|---|
| verseType | "mantra" |
|---|
| text | "अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् ।
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥3॥" |
|---|
|
| id | "Dwadasha-80" |
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|---|
| chapter | "DDS_C09" |
|---|
| verseType | "mantra" |
|---|
| text | "अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगतसुखेतर भव मम शरणम् ।
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥4॥" |
|---|
|
| id | "Dwadasha-81" |
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|---|
| chapter | "DDS_C09" |
|---|
| verseType | "mantra" |
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| text | "प्रचलितलयजलविहरणशाश्वत सुखमय मीन हे भव मम शरणम् ।
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥5॥" |
|---|
|
| id | "Dwadasha-82" |
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| chapter | "DDS_C09" |
|---|
| verseType | "mantra" |
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| text | "सुरदितिजसुबलवलिुलितमन्दरधर परकूर्म हे भव मम शरणम् ।
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥6॥" |
|---|
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| id | "Dwadasha-83" |
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|---|
| chapter | "DDS_C09" |
|---|
| verseType | "mantra" |
|---|
| text | "सगिरिवरधरातलवह सुसूकर परम विबोध हे भव मम शरणम् ।
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥7॥" |
|---|
|
| id | "Dwadasha-84" |
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|---|
| chapter | "DDS_C09" |
|---|
| verseType | "mantra" |
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| text | "अतिबलदितिसुतहृदयविभेदन जय नृहरेमल भव मम शरणम् ।
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥8॥" |
|---|
|
| id | "Dwadasha-85" |
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| parent | "DDS_C09" |
|---|
| chapter | "DDS_C09" |
|---|
| verseType | "mantra" |
|---|
| text | "बलिमुखदितिसुतविजयविनाशन जगदवनाजित भव मम शरणम् ।
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥9॥" |
|---|
|
| id | "Dwadasha-86" |
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| oldKey | "DDS_C09_V10" |
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| type | "verse" |
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| parent | "DDS_C09" |
|---|
| chapter | "DDS_C09" |
|---|
| verseType | "mantra" |
|---|
| text | "अविजितकुनृपतिसमितिविखण्डन रमावर वीरप भव मम शरणम् ।
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥10॥" |
|---|
|
| id | "Dwadasha-87" |
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| type | "verse" |
|---|
| parent | "DDS_C09" |
|---|
| chapter | "DDS_C09" |
|---|
| verseType | "mantra" |
|---|
| text | "खरतरनिशिचरदहन परामृत रघुवर मानद भव मम शरणम् ।
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥11॥" |
|---|
|
| id | "Dwadasha-88" |
|---|
| oldKey | "DDS_C09_V12" |
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| type | "verse" |
|---|
| parent | "DDS_C09" |
|---|
| chapter | "DDS_C09" |
|---|
| verseType | "mantra" |
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| text | "सुललिततनुवर वरद महाबल यदुवर पार्थप भव मम शरणम् ।
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥12॥" |
|---|
|
| id | "Dwadasha-89" |
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| type | "verse" |
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| parent | "DDS_C09" |
|---|
| chapter | "DDS_C09" |
|---|
| verseType | "mantra" |
|---|
| text | "दितिसुतमोहन विमलविबोधन परगुणबुद्ध हे भव मम शरणम् ।
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥13॥" |
|---|
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| id | "Dwadasha-90" |
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| parent | "DDS_C09" |
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| chapter | "DDS_C09" |
|---|
| verseType | "mantra" |
|---|
| text | "कलिमलहुतवह सुभग महोत्सव शरणद कल्कीश हे भव मम शरणम् ।
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥14॥" |
|---|
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| id | "Dwadasha-91" |
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| chapter | "DDS_C09" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "अखलिजनिवलिय परसुखकारण परपुरुषोत्तम भव मम शरणम् ।
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥15॥" |
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| id | "Dwadasha-92" |
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| chapter | "DDS_C09" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "इति तव नुतिवरसततरतेर्भव सुशरणमुरुसुखतीर्थमुनेर्भगवन् ।
शुभतमकथाशय परम सदोदित जगदेककारण राम रमारमण ॥16॥" |
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| text | "अवनः श्रीपतिरप्रतिरधिकेशादिभवादे ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥1॥" |
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| text | "सुरवन्द्याधिप सद्वर भरिताशेषगुणालम् ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥2॥" |
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| text | "सकलध्वान्तविनाशक परमानन्दसुधाहो ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥3॥" |
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| text | "त्रिजगत्पोत सदार्चितचरणाशापतिधातो ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥4॥" |
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| text | "त्रिगुणातीत विधारक परितो देहि सुभक्तिम् ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥5॥" |
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| text | "शरणं कारणभावन भव मे तात सदालम् ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥6॥" |
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| text | "मरणप्राणद पालक जगदीशाव सुभक्तिम् ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥7॥" |
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| text | "तरुणादित्यसवर्णकचरणाब्जामलकीर्ते ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥8॥" |
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| text | "सलिलप्रोत्थसरागकमणिवर्णोच्चनखादे ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥9॥" |
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| text | "खजतूणीनिभपावनवरजङ्घमितशक्ते ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥10॥" |
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| text | "इभहस्तप्रभशोभनपरमोरुस्थरमाले ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥11॥" |
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| text | "असनोत्फुल्लसुपुष्पकसमवर्णावरणान्ते ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥12॥" |
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| text | "शतमोदोद्भवसुन्दरवरपद्मोत्थितनाभे ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥13॥" |
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| text | "जगदागूहकपल्लवसमकुक्षे शरणादे ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥14॥" |
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| text | "जगदम्बामलसुन्दरगृलवक्षोवरयोगिन् ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥15॥" |
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| text | "दितिजान्तप्रद चक्रदरगदायुग्वरबाहो ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥16॥" |
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| text | "परमज्ञानमहानिधिवदनश्रीरमणेन्दो ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥17॥" |
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| text | "निखिलाघौघविनाशक परसौख्यप्रददृष्टे ।
करुणापूर्णवरप्रद ज्ञापय मे ते ॥18॥" |
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| text | "परमानन्दतीर्थमुनिराजो हरिगाथाम् ।
कृतावान्नित्यसुपूर्णैकपरमानन्दपदैषी ॥19॥" |
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| text | "उदीर्णमजरं दिव्यममृतस्यन्द्यधीशितुः ।
आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥1॥" |
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| text | "सर्ववेदपदोद्गीतमिन्दिरावासमुत्तमम् ।
आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥2॥" |
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| text | "सर्वदेवादिदेवस्य विदारितमहत्तमः ।
आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥3॥" |
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| text | "उदारमादरान्नित्यमनिन्द्यं सुन्दरीपतेः ।
आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥4॥" |
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| text | "इन्दीवरोदरनिभं सुपूर्णं वादिमोहदम् ।
आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥5॥" |
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| text | "दातृसर्वामरैश्वर्यविमुक्त्यादेरहो वरम् ।
आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥6॥" |
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| text | "दूराद् दूरतरं यत्तु तदेवान्तिकमन्तिकात् ।
आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥7॥" |
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| text | "पूर्णसर्वगुणैकार्णमनाद्यन्तं सुरेशितुः ।
आनन्दस्य पदं वन्दे ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दितम् ॥8॥" |
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| text | "आनन्दतीर्थमुनिना हरेरानन्दरूपिणः ।
कृतं स्तोत्रमिदं पुण्यं पठन्नानन्दतामियात् ॥9॥" |
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| chapter | "DDS_C12" |
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| text | "आनन्द मुकुन्द अरविन्दनयन ।
आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥1॥" |
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| chapter | "DDS_C12" |
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| text | "सुन्दरीमन्दिर गोविन्द वन्दे ।
आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥2॥" |
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| chapter | "DDS_C12" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "चन्द्रकमन्दिरनन्दक वन्दे ।
आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥3॥" |
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| chapter | "DDS_C12" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "चन्द्रसुरेन्द्रसुवन्दित वन्दे ।
आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥4॥" |
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| chapter | "DDS_C12" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "मन्दारस्यन्दकस्यन्दन वन्दे ।
आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥5॥" |
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| chapter | "DDS_C12" |
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| text | "वृन्दारकवृन्दसुवन्दित वन्दे ।
आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥6॥" |
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| chapter | "DDS_C12" |
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| text | "मन्दारस्यन्दितमन्दिर वन्दे ।
आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥7॥" |
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| chapter | "DDS_C12" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "मन्दिरस्यन्दनस्यन्दक वन्दे ।
आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥8॥" |
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| chapter | "DDS_C12" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "इन्दिरानन्दकसुन्दर वन्दे ।
आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥9॥" |
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| chapter | "DDS_C12" |
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| verseType | "mantra" |
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| text | "आनन्दचन्द्रिकास्यन्दन वन्दे ।
आनन्दतीर्थपरानन्दवरद ॥10॥" |
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